काल सर्प दोष क्या है? और इसके प्रकार

काल सर्प दोष क्या है? और इसके प्रकार

kaal sharp dosh

भारतीय ज्योतिष के अनुसार कुंडली मे राहु और केतु के सन्दर्भ मे अन्य ग्रह की स्थितियों के अनुसार व्यक्ति की कुंडली मे कालसर्प दोष का योग बनता है। मुख्यता कालसर्प को अशुभ योग माना जाता है। कालसर्प दोष व्यक्ति के पूर्व जन्म के अपराध या दंड के कारण उसकी कुंडली मे बैठ जाता है, जिस वजह से जातक को कई परेशानी झेलनी पड़ती है। अगर जातक की कुंडली मे ९-७ ग्रह के बीच राहु केतु आ जाते है तो काल सर्प का योग बन जाता है। ज्योतिष के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की कुंडली मे कालसर्प दोष लगता है तो उसके जीवन मे कई तरह की परेशानिया आती है , बने हुए कार्य भी बिगड़ जाते है।

आइये जाने कालसर्प दोष के प्रकार :

1. अंनत काल सर्प दोष

यदि लगन मे राहु एव सप्तम मे केतु हो तो अनंत कालसर्प का योग बनता है। अनंत कल सर्प योग के कारण व्यक्ति को मानसिक शांति नहीं मिल पाती और उसका वैवाहिक जीवन मुश्किलों से भरा होता है।

2. कुलिक कालसर्प दोष

यदि राहु धन भाव मे एव केतु अष्टम मे हो तो कुलिक कालसर्प दोष बनता है ! ऐसे जातक को धन और स्वस्थ सम्बंधित परेशानी का सामना करना पड़ता है |

3. वासुकी कालसर्प योग

यदि कुंडली के तृतीय भाव मे राहु एव नवम मे केतु हो और मध्य मे सरे ग्रह हो तो ये योग बनता है |इस योग मे व्यक्ति का भाग्य उदय,नौकरी मे बाधा, पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ता है |

4. शंखपाल कालसर्प योग

राहु नवम मे एव केतु तृतीय मे तो ये योग बनता है! ऐसे जातको को पिता का सुख प्राप्त नहीं होता |

5. पद्म कालसर्प योग

पंचम भाव मे राहु एव एकादश मे केतु हो तो ये योग बनता है !इस योग मे संतान सुख का आभाव होता है |

6. महापद्म कालसर्प योग

यदि राहु छठे भाव एव केतु व्यय भाव मे हो तो यह योग बनता है | इसमे पत्नी विरह,और आय मे कमी होती है |

7. तक्षक कालसर्प योग

राहु सप्तम मे एवं केतु लग्न मे हो तो ये योग बनता है | इसमे पैतृक सम्पति नष्ट हो जाती है |

8. कर्कोटक कालसर्प योग

राहु अष्टम मे एवं केतु धन भाव मे हो तो ये योग बनता है , ऐसे जातको को कई प्रकार की बिमारियों का सामना करना पड़ता है |

9. शंखचूड़ कालसर्प योग

राहु सुख भाव मे एवं केतु कर्म भाव मे तो ये योग बनता है ! ऐसे जातक को व्यवसाय मे उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ता है |

10. घातक कालसर्प योग

राहु दशम मे एवं केतु सुख भाव मे हो तो ये योग बनता है | ऐसे व्यक्ति संतान के रोग से परेशान रहते है |

11. विषधर कालसर्प योग

राहु लाभ मे और केतु पुत्र भाव मे हो तो ये योग बनता है | ऐसे जातक घर से दूर रहते है |

12. शेषनाग कालसर्प योग

यदि राहु व्यय मे एवं केतु रोग मे हो तो , ऐसे जातक शत्रु से पीड़ित रहते है |

कालसर्प योग के लक्षण

  • जो जातक इस दोष से पीड़ित रहता है उससे स्वप्न मे सर्प का बार बार दिखाई देना |
  • अत्यधिक परिश्रम के बाद भी सफलता न मिलना|
  • मानसिक तनाव|
  • परिवार मे कलह
  • गुप्तशत्रु का होना|
  • वैवाहिक जीवन मे समस्या
  • संतान न होना, धोखा खाना, लम्बी बीमारी, अकाल मृत्यु, दुर्घटना का बार बार होना, विद्या मे कई प्रकार की बाधा उत्पन होना आदि |

इनसब समस्या से यदि आप भी परेशान है तो हो सकता है की आपकी कुंडली मे भी कालसर्प का योग हो आइये जाने किस प्रकार इस दोष को काम किया जा सकता है :

  • श्रवण मास के महीने मे भगवन शिव का रुद्राभिषेक करे |
  • शिवलिंग पर दूध और मिश्री अर्पित करे |
  • शिव तांडव स्त्रोत का पाठ प्रतिदिन करे |
  • राहु शांति का उपाय रात मे करे! राहु की पूजा शिव मंदिर मे रात के समय राहुकाल मे करे
  • भ्रादपद मास की अमावस्या कालसर्प दोष के निवारण के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है

अगर आप भी कालसर्प दोष से पीड़ित है और इसका समाधान चाहते है तो आप हमारे AstroSOLV App के माध्यम से प्रसिद्द ज्योतिषाचार्यो से बात कर सकते है।

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